तानाशाही अंदाज़ दिखाने वाली
सिंहासन हिल उठा पत्रकारो ने भी हार मानी थी आज़ाद भारत में भी फिर से छाई गुलामी थी उसके शक्ति की कीमत को सबने पहचानी थी जेपी को दूर करने को उसने मन में ठानी थी चमक उठी थी सन् पचहत्तर में वो अंदाज़ सियासी थी आडवाणी, लालू ,मुलायम और वाजपेयी के मुंह हमने सुनी कहानी थी तानाशाही अंदाज़ दिखानी वाली वो तो फ़िरोज़ की रानी थी बंगाल के सीएम सिद्धार्त की वो मुँहबोली मेडम थी इंदरा नाम, पिता की वो संतान अकेली थी संजय का ही सुनती थी, किचेन केबिनेट चलाती थी हिटलर की कथाएँ उसको याद ज़ुबानी थी देवोगेड़ा, त्यागी और वरिष्ठ पत्रकारों के मुंह हमने सुनी कहानी थी तानाशाही अंदाज़ दिखाने वाली वो तो नेहरू की लाडली थी । ©अनिल के. राय Anil K. Ray www.facebook.com/anilkray.fanpage